Tu mujhse kuch chupa rahe hoo..(u are hidding smthing frm me)
khud mangte hoo bhiksha....(u beg pple for every thing
or mujhe diye ja rahe hoo..(but ur slef giving me every thing)
tum mujhse kuch chupa rahe hoo...(u are hidding smthing frm me)
tumne sharir choda...(u left ur body)
prakriti k niyan ko na torda...(didnt broke rule of nature)
lakin ab bhi darshan diye ja rahe hoo...(but still u are present in us)
baba tum kon ho...(sai baba who are u)
yahi mujhse chupa rahe hoo...(dis thing u are hidding frm me)
baba! tum kya mile....(baba i got u since
lga koi apna milgya...(i feel i got sm1 mine).
socha tha tumhare pass batugi...(thought i vil cm to meet u
tumhe apni appbiti sunaugi...(n tell u smthing about me
lakin 1k tum ho jo bina mere bole(but itz u who is listening me
sab sune ke muskura rahe hoo...(widout i say any thing)
baba! tum kon ho yeh mujhse chupa rahe hoo...(sai baba who are u
..just thing thing u r hidding frm me))
peom translation for sm pple who are not through wid hindi) sai ram..
Sunday, January 31, 2010
Monday, January 18, 2010
Yada Yada Hi Dharmasya
Beautiful Poem Of Om Sai Ram
Tu mujhse kuch chupa rahe hoo..(u are hidding smthing frm me)
khud mangte hoo bhiksha....(u beg pple for every thing
or mujhe diye ja rahe hoo..(but ur slef giving me every thing)
tum mujhse kuch chupa rahe hoo...(u are hidding smthing frm me)
tumne sharir choda...(u left ur body)
prakriti k niyan ko na torda...(didnt broke rule of nature)
lakin ab bhi darshan diye ja rahe hoo...(but still u are present in us)
baba tum kon ho...(sai baba who are u)
yahi mujhse chupa rahe hoo...(dis thing u are hidding frm me)
baba! tum kya mile....(baba i got u since
lga koi apna milgya...(i feel i got sm1 mine).
socha tha tumhare pass batugi...(thought i vil cm to meet u
tumhe apni appbiti sunaugi...(n tell u smthing about me
lakin 1k tum ho jo bina mere bole(but itz u who is listening me
sab sune ke muskura rahe hoo...(widout i say any thing)
baba! tum kon ho yeh mujhse chupa rahe hoo...(sai baba who are u
..just thing thing u r hidding frm me))
khud mangte hoo bhiksha....(u beg pple for every thing
or mujhe diye ja rahe hoo..(but ur slef giving me every thing)
tum mujhse kuch chupa rahe hoo...(u are hidding smthing frm me)
tumne sharir choda...(u left ur body)
prakriti k niyan ko na torda...(didnt broke rule of nature)
lakin ab bhi darshan diye ja rahe hoo...(but still u are present in us)
baba tum kon ho...(sai baba who are u)
yahi mujhse chupa rahe hoo...(dis thing u are hidding frm me)
baba! tum kya mile....(baba i got u since
lga koi apna milgya...(i feel i got sm1 mine).
socha tha tumhare pass batugi...(thought i vil cm to meet u
tumhe apni appbiti sunaugi...(n tell u smthing about me
lakin 1k tum ho jo bina mere bole(but itz u who is listening me
sab sune ke muskura rahe hoo...(widout i say any thing)
baba! tum kon ho yeh mujhse chupa rahe hoo...(sai baba who are u
..just thing thing u r hidding frm me))
Thursday, January 14, 2010
क्रोध ही करुणा लेकिन कब?

क्रोध एक अग्नि है
जिससे सिर्फ़ अपना
नास होता है, दूसरे
का नहीं।
याद रहे, क्रोध वह अग्नि है जिससे सिर्फ़ अपना नास होता है, दूसरे का नहीं। दूसरे का अगर आपके क्रोध के कारण जरा सा नास होता है तो याद रहे, आपकी शामत आई। वह उतने ज़ोर से आपसे बदला ले लेगा। जब भी आप कभी अपने क्रोध को दूसरों के ऊपर फेंकते तो सामने वाला भी कोई महावीर या बुद्ध नहीं है, सामने वाला भी आपके जैसा ही है। आपके किए वार का बहुत उचित जवाब दे देगा। अगर आपसे बड़ा है तो उसी समय दे देगा, अगर आपसे छोटा है तो मौके की तलाश करेगा, जब वह बड़ा हो जाएगा बदला ले लेगा। तो एक दूसरे को हम नाहक पीड़ा देते हैं ।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि दूसरों को भूल जाइए। इससे आप स्वयं को पीड़ा देते हैं। इस बात को स्वीकार करके लो कि मुझे क्रोध से सच में बाहर आना है और महत्वकांक्षा को छोड़ना है ।
क्रोध से तुम तब तक नहीं बच सकते, जब तक तुम अपनी महत्वकांक्षाओं को छोड़ोगे नहीं। यह तो ऐसे ही कि एक महिला आटा गूंद रही थी, अब आटा गूंदेगी तो हिलेगी, हाथ चलेंगे, मुठियों को आटे के ऊपर दबाएगी ही ……. तो उसकी सास उसको डांटने लगी कि ‘यह कैसे आटा गूंद रही है? हिल क्यों रही है ? हिले बगैर आटा गूंदो। ‘अब हिले बगैर आटा कैसे गूंदा जाए? आटा गूंदोगे तो हिलना होगा ही। ऐसे ही महत्वकांक्षाएं रखोगे, तो क्रोध होगा ही। क्रोध होगा तो दुखी होवोगे ।
हम लोग दुखी इसलिए नहीं होते कि हमारे जीवन में दुःख होता है। हम लोग दुखी इसलिए होते हैं कि हमें दूसरो के जीवन में सुख दिखता है और मन में लोभ उठता है कि यह सब मेरे पास क्यों नहीं है। हम अपने दुखों से दुखी नहीं है, हम दूसरो के सुख से दुखी हैं। क्योंकि दूसरे का सुख देखते ही मन में लालच उठता है कि ‘ये इसके पास है मेरे पास क्यों नहीं। यह इसको मिल गया, तो मुझे क्यों नहीं । हमने क्या पाप किए हैं कि हमें नहीं मिला, इसको मिल रहा है।’
क्रोध ऊर्जा है, क्रोध को करुणा में बदल सकते हैं। ऊर्जा वही है। वही क्रोध है पर वही क्रोध करुणा का रूप लेकर अमृत जैसा हो जाता है।’ हम अपने क्रोध को करुणा में कैसे बदलें ‘ इस विधि को मैंने बताया है, पर सबसे पहली बात तो यह आती है कि क्या तुम क्रोध से छूटना भी चाह रहे हो? तुम कहो कि मैं अपनी महत्वकांक्षा को भी बनाये रखूं और क्रोध से भी छूट जाऊँ तो यह नहीं हो सकता ।
दो बातें सिर्फ़ कहती हूँ कि आप अपनी खुशी को बाहर किसी विशेष स्थिति में सीमित न करें। और आप दूसरों को मत देखें। अगर ये दो काम कर सकें तो आप बहुत आनंद से रह सकेंगे। नहीं तो किसी नौकरी में रहो, किसी भी डिपार्टमेन्ट में रहो, अंतत: दुखी ही रहोगे। जब तक दूसरों को देखते रहोगे, जब तक महत्वकांक्षाओं में रहोगे, दुखी रहोगे।
जीवन का मजा यह है
कि आप अपनी खुशी
को बाहर किसी विशेष
स्थिति में सीमित न करें ।
और आप दूसरों
को मत देखो
जीवन का मजा यह है कि आप अपने कार्य करते है, आप अपने काम बहुत अच्छे ढंग से करते हैं, बुद्धि को लगाते हैं, शरीर से श्रम करते हैं, और श्रम करने में आनंद होता है, चीजों में आनंद नहीं होता। पदवियों में अपने आनंद को नहीं ढूँढते, कि ‘ यह पदवी होगी तो आनंद होगा’, ‘ यह पदवी नहीं होगी तो आनंद नहीं होगा ‘; ‘ जिस दिन मैं यह बन जाऊँ तभी आनंद मिलेगा ‘, ‘यह नहीं होगा तो सुख नहीं होगा ‘; अब अगर इस तरह की शर्तों के साथ तुम जीओगे तो दुखी ही रहोगे।
जय श्री राधा कृष्ण
कृष्ण है श्रद्धा कृष्ण है भक्ती कृष्ण है विश्वास
कृष्ण है श्रद्धा कृष्ण है भक्ती कृष्ण है विश्वास |
कृष्ण को बेंद सुमिरन कर ले कृष्ण है तेरे पास ||
जब जब सुमिरा हरी भक्तो ने उनके पास वो आया ,
हर संकट को हरी ने हर के मन सबको हर्षाया |
सच्चे भक्तो के पापों का पल में करता नाश ||
श्रद्धा से भक्ती है मिलाती भक्ती से भगवान,
कर इसका विश्वास रे प्राणी गीता का है गयांन |
‘दास नारायण ‘ शरण तुम्हारी पूरी कर दो आस ||
कृष्ण को बेंद सुमिरन कर ले कृष्ण है तेरे पास ||
जब जब सुमिरा हरी भक्तो ने उनके पास वो आया ,
हर संकट को हरी ने हर के मन सबको हर्षाया |
सच्चे भक्तो के पापों का पल में करता नाश ||
श्रद्धा से भक्ती है मिलाती भक्ती से भगवान,
कर इसका विश्वास रे प्राणी गीता का है गयांन |
‘दास नारायण ‘ शरण तुम्हारी पूरी कर दो आस ||
मिलकर जुदा हुए तो
मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम,
एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम,
आंसू छलक छलक के सतायेंगे रात भर,
मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम,
जब दूरियों की याद दिलों को जलायेगी,
जिस्मों को चांदनी में भिगोया करेंगे हम,
गर दे गया दगा हमें तूफ़ान भी ‘क़तील’,
साहिल पे कश्तियों को डुबोया करेंगे हम,
एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम,
आंसू छलक छलक के सतायेंगे रात भर,
मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम,
जब दूरियों की याद दिलों को जलायेगी,
जिस्मों को चांदनी में भिगोया करेंगे हम,
गर दे गया दगा हमें तूफ़ान भी ‘क़तील’,
साहिल पे कश्तियों को डुबोया करेंगे हम,
जहाँ जहाँ मुझे सेहरा दिखायी देता है
जहाँ जहाँ मुझे सेहरा दिखायी देता है,
मेरी तरह से अकेला दिखायी देता है,
यह एक अब्र का टुकडा कहाँ कहाँ बरसे,
तमाम दस्त ही प्यासा दिखायी देता है,
यह किस मकाम पे लाई है जुस्तजू तेरी,
जहाँ से अर्श भी नीचा दिखायी देता है,
मेरी तरह से अकेला दिखायी देता है,
यह एक अब्र का टुकडा कहाँ कहाँ बरसे,
तमाम दस्त ही प्यासा दिखायी देता है,
यह किस मकाम पे लाई है जुस्तजू तेरी,
जहाँ से अर्श भी नीचा दिखायी देता है,
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